पीएम विश्वकर्मा योजना 2026: देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की गई है। योजना के तहत हाथ और औजारों से पारंपरिक काम करने वाले कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए सहायता, पहचान पत्र और आसान शर्तों पर ऋण जैसी सुविधाएं दी जाती हैं।
इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, उनके कौशल को बेहतर बनाना और उन्हें अपना काम बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए केंद्र सरकार की सहायता योजना है। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पारंपरिक व्यवसाय करने वाले पात्र लोगों को प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना में शामिल कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र, कौशल प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान दैनिक भत्ता, टूलकिट सहायता और बिना गारंटी के रियायती ब्याज दर पर ऋण जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए कौन पात्र है?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होती हैं।
- आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
- आवेदक हाथ और औजारों से काम करने वाला पारंपरिक कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए।
- व्यक्ति को योजना में शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों में से किसी एक में स्वरोजगार के आधार पर काम करना चाहिए।
- एक परिवार से केवल एक सदस्य को योजना का लाभ मिल सकता है। परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चों को शामिल माना जाता है।
- पिछले 5 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी समान ऋण आधारित योजना के तहत ऋण लेने वाले व्यक्ति पर योजना के नियम लागू होंगे।
- परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत होने पर योजना की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
किन कारीगरों को योजना में शामिल किया गया है?
पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से:
- बढ़ई
- नाव निर्माता
- अस्त्रकार
- लोहार
- हथौड़ा और औजार निर्माता
- ताला बनाने वाला
- सुनार
- कुम्हार
- मूर्तिकार और पत्थर तराशने वाला
- मोची और जूता बनाने वाला
- राजमिस्त्री
- टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाला
- गुड़िया और खिलौना निर्माता
- नाई
- माला बनाने वाला
- धोबी
- दर्जी
- मछली का जाल बनाने वाला
पीएम विश्वकर्मा योजना में क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
1. पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र
पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत डिजिटल प्रमाण पत्र और पहचान पत्र दिया जाता है। इससे उन्हें योजना के अंतर्गत मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं से जोड़ा जाता है।
2. कौशल प्रशिक्षण
कारीगरों को अपने पारंपरिक काम से संबंधित कौशल को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है।
- बुनियादी प्रशिक्षण: लगभग 5 से 7 दिन
- उन्नत प्रशिक्षण: इच्छुक लाभार्थियों के लिए 15 दिन या उससे अधिक
- प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का भत्ता
3. टूलकिट के लिए ₹15,000
आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए पात्र लाभार्थी को ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य कारीगरों को बेहतर और आधुनिक औजार उपलब्ध कराना है।
4. ₹3 लाख तक का ऋण
कारीगरों को अपना व्यवसाय शुरू करने या बढ़ाने के लिए बिना गारंटी के कुल ₹3 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
यह ऋण दो चरणों में दिया जाता है। पहले चरण में ₹1 लाख तक और निर्धारित शर्तों को पूरा करने के बाद दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का ऋण मिल सकता है।
ऋण पर रियायती ब्याज दर 5 प्रतिशत निर्धारित है।
5. डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन
योजना के तहत डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पात्र लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर प्रोत्साहन भी दिया जाता है। निर्धारित नियमों के अनुसार प्रत्येक पात्र डिजिटल लेनदेन पर ₹1 तक का प्रोत्साहन मिल सकता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन या पंजीकरण के लिए सामान्य तौर पर निम्न जानकारी और दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है:
- आधार कार्ड
- आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर
- बैंक खाते की जानकारी
- बैंक पासबुक और आईएफएससी कोड
- मोबाइल नंबर
- राशन कार्ड या परिवार से संबंधित जानकारी
- व्यवसाय और पारंपरिक काम से संबंधित जानकारी
- जाति या श्रेणी प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
दस्तावेजों की अंतिम आवश्यकता आवेदन प्रक्रिया और संबंधित सत्यापन नियमों के अनुसार हो सकती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन कैसे करें?
पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकरण के लिए लाभार्थी अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जा सकते हैं।
आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
- नजदीकी सीएससी केंद्र पर जाएं।
- आधार कार्ड और बैंक खाते से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं।
- आधार आधारित प्रमाणीकरण और आवश्यक बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करें।
- सीएससी संचालक के माध्यम से पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर पंजीकरण कराएं।
- आवेदन में अपने पारंपरिक व्यवसाय से संबंधित सही जानकारी दर्ज कराएं।
- आवेदन जमा होने के बाद निर्धारित स्तरों पर सत्यापन किया जाता है।
- सत्यापन पूरा होने पर पात्र लाभार्थी को योजना के तहत आगे की सुविधाओं के लिए जोड़ा जाता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना का आधिकारिक पोर्टल
आवेदन करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
पीएम विश्वकर्मा योजना के नाम पर कई फर्जी वेबसाइट और एजेंट लोगों से पैसे मांग सकते हैं। आवेदन या पंजीकरण के लिए केवल आधिकारिक माध्यम का इस्तेमाल करें।
किसी अनजान व्यक्ति को आधार, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति योजना का लाभ दिलाने के नाम पर अनधिकृत शुल्क मांगता है, तो पहले उसकी विश्वसनीयता जांच लें।
निष्कर्ष
पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए अपने कौशल को आधुनिक बनाने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर देती है। पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षण, प्रशिक्षण भत्ता, ₹15,000 तक टूलकिट सहायता और ₹3 लाख तक का रियायती ऋण जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं।
हालांकि, योजना का लाभ केवल निर्धारित पात्रता और सत्यापन पूरा करने वाले लाभार्थियों को ही मिलता है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर जांच लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पीएम विश्वकर्मा योजना में कितने रुपये का ऋण मिलता है?
योजना के तहत पात्र कारीगरों को कुल ₹3 लाख तक का ऋण मिल सकता है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में टूलकिट के लिए कितने रुपये मिलते हैं?
पात्र लाभार्थियों को आधुनिक उपकरण खरीदने के लिए ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता मिल सकती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना में प्रशिक्षण के दौरान कितने रुपये मिलते हैं?
प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित नियमों के अनुसार ₹500 प्रतिदिन का भत्ता दिया जाता है।
क्या पीएम विश्वकर्मा योजना में सभी कारीगर आवेदन कर सकते हैं?
नहीं। केवल योजना में शामिल निर्धारित 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े और पात्रता शर्तें पूरी करने वाले कारीगर आवेदन कर सकते हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन कहां करें?
पंजीकरण के लिए नजदीकी सीएससी केंद्र की सहायता ली जा सकती है और आधिकारिक पोर्टल से योजना की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।