लाडकी बहिन योजना पर श्वेत पत्र की मांग, सुप्रिया सुले ने उठाए सवाल

लाडकी बहिन योजना: महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने योजना में अपात्र लाभार्थियों को भुगतान किए जाने की रिपोर्टों पर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

सुले ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए योजना के तहत अपात्र लोगों को कथित तौर पर हुए भुगतान की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और मामले की जांच कराने की मांग की। उनके अनुसार, योजना के वित्तीय आंकड़ों और अपात्र लाभार्थियों से जुड़े रिकॉर्ड को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सुप्रिया सुले ने क्या कहा?

बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने दावा किया कि उपलब्ध आंकड़ों से योजना के क्रियान्वयन और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि योजना के तहत कितनी राशि किस श्रेणी के लाभार्थियों को दी गई और अपात्र पाए गए लोगों के मामलों में क्या कार्रवाई की गई।

उन्होंने ₹5,000 करोड़ से अधिक राशि के कथित भुगतान का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

यह आंकड़ा और इससे जुड़े आरोप सुले द्वारा रखे गए दावों पर आधारित हैं। सरकार की ओर से इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।

20 लाख से ज्यादा अपात्र लाभार्थियों का दावा

सुले के मुताबिक, 20 लाख से अधिक लाभार्थी अपात्र पाए गए और इनमें से कई को कई महीनों तक ₹1,500 की मासिक किस्त मिलने की बात सामने आई है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 14,000 पुरुषों ने भी योजना का लाभ लिया।

लाडकी बहिन योजना के मूल सरकारी नियमों के अनुसार योजना की पात्र लाभार्थी महाराष्ट्र की 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की विवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और निराश्रित महिलाएं हैं। योजना में पात्र महिला को ₹1,500 प्रति माह डीबीटी के माध्यम से देने का प्रावधान किया गया था।

योजना में अपात्रता की प्रमुख शर्तें क्या हैं?

महाराष्ट्र सरकार के मूल शासन निर्णय में कई परिस्थितियों में लाभार्थी को अपात्र माना गया है। इनमें प्रमुख रूप से:

  • परिवार की वार्षिक आय ₹2.50 लाख से अधिक होना।
  • परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता होना।
  • परिवार में केंद्र या राज्य सरकार का नियमित, स्थायी या संविदा कर्मचारी होना।
  • परिवार में कुछ श्रेणियों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि होना।
  • परिवार के सदस्यों के पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि होना।
  • परिवार के सदस्य के नाम चार पहिया वाहन होना, हालांकि ट्रैक्टर को इस शर्त से बाहर रखा गया है।
  • कुछ अन्य सरकारी आर्थिक योजनाओं से निर्धारित सीमा से अधिक आर्थिक लाभ मिलना।

इसलिए किसी लाभार्थी का बाद में अपात्र पाया जाना और योजना की शुरुआत से ही अपात्र होना, दोनों को अलग-अलग परिस्थितियों के रूप में देखा जाना जरूरी है।

कितनी महिलाओं को योजना से बाहर किया गया? आंकड़ों पर सवाल

सुप्रिया सुले ने योजना से बाहर किए गए लाभार्थियों की संख्या को लेकर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

उन्होंने दावा किया कि एक आंकड़े के अनुसार 82 लाख महिलाओं को जांच के बाद अपात्र किया गया है, जबकि एक मंत्री के बयान में यह संख्या 92 लाख बताई गई। सुले ने सरकार से पूछा कि वास्तविक संख्या क्या है और इस अंतर की वजह क्या है।

ऐसे आंकड़ों की सही स्थिति जानने के लिए सरकार द्वारा जारी आधिकारिक और अद्यतन आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।

जुलाई 2024 में शुरू हुई थी योजना

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार ने 2024 में शुरू की थी। सरकारी दस्तावेज के अनुसार योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में मदद करना है।

मूल योजना में पात्र महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से देने का प्रावधान किया गया था।

श्वेत पत्र की मांग क्यों महत्वपूर्ण है?

सुप्रिया सुले की मांग का मुख्य मुद्दा योजना के लाभार्थियों, सरकारी खर्च और अपात्र लाभार्थियों को हुए कथित भुगतान से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करना है।

श्वेत पत्र जारी होने की स्थिति में सरकार से योजना के तहत कुल खर्च, लाभार्थियों की संख्या, सत्यापन के बाद अपात्र पाए गए लोगों की संख्या और उनके मामलों में की गई कार्रवाई जैसी जानकारियां सार्वजनिक किए जाने की अपेक्षा की जा सकती है।

फिलहाल यह मांग विपक्ष की ओर से उठाई गई है। सरकार की ओर से इस मांग पर क्या आधिकारिक जवाब दिया जाता है, इससे आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

लाडकी बहिन योजना: मुख्य जानकारी

जानकारीविवरण
योजनामुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना
राज्यमहाराष्ट्र
शुरुआत2024
मूल मासिक सहायता₹1,500
भुगतान का तरीकाडीबीटी
मूल पात्र आयु21 से 60 वर्ष
प्रमुख लाभार्थीपात्र महिलाएं
मौजूदा विवादअपात्र लाभार्थियों और सरकारी खर्च से जुड़े दावे
मांगयोजना पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग

निष्कर्ष

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर अपात्र लाभार्थियों, सरकारी खर्च और सत्यापन के आंकड़ों पर राजनीतिक बहस जारी है। सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार से योजना पर श्वेत पत्र जारी करने और भुगतान से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।

वहीं, योजना के आधिकारिक नियमों में पात्रता और अपात्रता की कई शर्तें पहले से निर्धारित हैं।

अब इस मामले में सरकार की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़े और स्पष्टीकरण यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कितने लाभार्थी अपात्र पाए गए, कितनी राशि प्रभावित हुई और ऐसे मामलों में आगे क्या कार्रवाई की गई।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लाडकी बहिन योजना में कितनी राशि मिलती है?
मूल सरकारी योजना के अनुसार पात्र महिला को ₹1,500 प्रति माह डीबीटी के माध्यम से देने का प्रावधान है।

लाडकी बहिन योजना पर श्वेत पत्र की मांग किसने की है?
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने योजना पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

योजना की मूल पात्र आयु कितनी थी?
मूल शासन निर्णय में पात्र महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष निर्धारित की गई थी।

क्या अपात्र लाभार्थियों को भुगतान का आंकड़ा आधिकारिक रूप से तय हो चुका है?
इस मुद्दे पर अलग-अलग आंकड़े और राजनीतिक दावे सामने आए हैं। इसलिए अंतिम संख्या के लिए महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक जांच या अद्यतन आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी है।


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