छत्तीसगढ़: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मल्हनिया जलाशय में आधुनिक केज कल्चर को बढ़ावा दिया गया है। योजना और जिला खनिज न्यास निधि (DMFT) के सहयोग से यहां मछुआरा सहकारी समिति के सदस्यों ने पारंपरिक मछली पकड़ने के साथ पिंजरा मछली पालन शुरू किया है।
इस पहल से मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हुए हैं।
54 केज में हो रहा मछली पालन
गौरेला विकासखंड के देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में 54 केज स्थापित किए गए हैं। इनमें उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है।
यह परियोजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि के सहयोग से संचालित की जा रही है।
44 मछुआरा सदस्यों को मिला रोजगार
मल्हनिया जलाशय में वर्ष 2002 से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति मर्यादित काम कर रही है। वर्तमान में समिति से 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हैं।
इनमें 26 सदस्य विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) बैगा समुदाय से संबंधित हैं।
केज कल्चर शुरू होने से पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से पारंपरिक तरीके से मछली पकड़कर अपनी आजीविका चलाते थे।
पहले 2.5 से 3 लाख रुपये तक थी वार्षिक आय
समिति के अनुसार, पहले जलाशय की लीज और अन्य खर्चों के बाद उसकी वार्षिक आय करीब 2.5 से 3 लाख रुपये तक सीमित थी।
मछुआरों की आय और रोजगार को बढ़ाने के लिए आधुनिक केज कल्चर को अपनाया गया। इसके बाद मछली उत्पादन और बिक्री की गतिविधियों में विस्तार हुआ।
एक साल में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री
केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति द्वारा एक वर्ष में करीब 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री किए जाने की जानकारी दी गई है।
वर्तमान में केजों में लगभग 10 से 15 टन मछली उपलब्ध बताई गई है। समिति के सदस्यों के अनुसार, इस गतिविधि से उन्हें औसतन 6 से 7 हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय प्राप्त हो रही है।
इससे परिवारों की नियमित जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है और पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भरता भी कम हुई है।
क्या है केज कल्चर?
केज कल्चर मछली पालन की आधुनिक तकनीक है। इसमें जलाशय या अन्य जल निकाय में जालीदार पिंजरों के अंदर मछलियों का पालन किया जाता है।
इस तकनीक से मछलियों की देखभाल, भोजन और उत्पादन को अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। जलाशयों में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल करते हुए मछली उत्पादन बढ़ाना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
PM Matsya Sampada Yojana का उद्देश्य
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर तैयार करना और मछुआरों तथा मछली किसानों की आय में सुधार करना है।
इसके तहत अंतर्देशीय मत्स्य पालन, केज कल्चर, बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहन दिया जाता है।
मल्हनिया जलाशय में 54 केज की स्थापना इसी तरह की पहल का स्थानीय उदाहरण है, जहां पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है।
बैगा समुदाय के लिए भी रोजगार का अवसर
इस परियोजना में बैगा समुदाय के 26 सदस्यों की भागीदारी है। इससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का अवसर मिला है।
जलाशय और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने से समिति के सदस्यों के लिए आजीविका का एक अतिरिक्त माध्यम विकसित हुआ है।
निष्कर्ष
मल्हनिया जलाशय में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और DMFT के सहयोग से शुरू हुआ केज कल्चर स्थानीय मछुआरों के लिए आय और रोजगार का नया माध्यम बना है। 54 केज के जरिए मछली उत्पादन और बिक्री बढ़ी है, जबकि 44 सदस्यीय सहकारी समिति को नियमित आर्थिक गतिविधि से जुड़ने का अवसर मिला है।
यह उदाहरण दिखाता है कि आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक और सरकारी सहायता को स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।